samajun ghetana समजून घेताना...
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शुक्रवार, 25 मई 2012
क्षण क्षण
तुझा अनिवार स्पर्श
माझा उभा देह
कापराचा...
तुझे हळुवार शब्द
माझा क्षण क्षण
गोठण्याचा...
1 टिप्पणी:
हरी
9 जून 2014 को 10:11 am बजे
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